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रावण के असल में नहीं थे 10 सिर! जानें क्या थी कहानी

JTV NEWS | Admin

Updated on : October 07, 2019


रावण के असल में नहीं थे 10 सिर! जानें क्या थी कहानी


नई दिल्ली। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा, जिससे कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। विविधताओं से भरे इस देश में विजयदशमी को लेकर बहुत-सी कहानियां हैं। बंगाल में इस दिन को महिषासुर का वध करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना के लिए जाना जाता है, तो भारत के उत्तरी हिस्से में श्रीराम की रावण पर जीत के रूप में दशहरा को जाना जाता है। इसी तरह जैन शास्त्रों में रावण से जुड़े कई पहलू पता चलते हैं, इनमें रावण के दस सिर से जुड़ी हुई एक मान्यता भी है, इसके अनुसार रावण के असल में दस सिर नहीं थे बल्कि लोगों के बीच अपनी आराधना कराने के लिए रावण ने लोगों के मन में एक भ्रम डाल दिया था, जिससे लोगों को लगे कि किसी देवता या किसी चमत्कारी व्यक्ति की तरह उसके पास दिव्य शक्ति है। 
जैन शास्त्रों में लिखी है मणि है 9 मणियों की कहानी
जैन शास्त्रों के अनुसार रावण के दस सिर नहीं थे बल्कि वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे ‘दशानन’ कहते थे। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं। उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था। मान्यता अनुसार रावण कभी भी उस मणि को अपने से अलग नहीं करता था, इसी वजह से लोगों को लगता था कि रावण के दस सिर है। उस समय लंका के लोगों के मन में इस वजह से भी रावण को लेकर बहुत भय था। 


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